मृत्ति से आकाश तक
जो कुछ रहा
वह इक अकेला
सत्य तो शायद न था...
एक सत्य
मेरे भी हृदय में
सांस लेता,
ढूंढता कुछ,
पलता रहा...
*****
तुम किसी
आदिम इहा को ढूंढते,
मानस पटल पर
नित नया इतिहास लिखते
बढ़ चले...
और शेष जो था
वो मेरे अंतस में
अंकित सत्व तेरा,
फूलता-फलता रहा...

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