मुझे ऐसी जगह ले चलो
जहाँ उम्मीद खत्म हो जाये
और नाउम्मीदी को
बस बख़्श दिया जाये
मुझे ऐसी जगह ले चलो
जहाँ टूटे सपनों की परतें
थोड़ी-थोड़ी कर अपने जिस्म से उतार सकूँ
और हिम्मत का मुखौटा भी न लगाना पड़े
मुझे ऐसी जगह ले चलो
जहाँ बस एक बार थक कर, टूट कर बैठ सकूँ
और खुद को या किसी और को
कोई जवाब न देना पड़े
मुझे ऐसी जगह ले चलो
जहाँ रोऊँ तो अन्दर सब खाली हो जाये
किसी दर्द, किसी मुहब्बत का
कोई नामोनिशान न रह जाये

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