Tuesday, May 13, 2014

मृत्ति से आकाश तक
जो कुछ रहा
वह इक अकेला
सत्य तो शायद न था...
एक सत्य
मेरे भी हृदय में
सांस लेता,
ढूंढता कुछ,
पलता रहा...
*****
तुम किसी
आदिम इहा को ढूंढते,
मानस पटल पर
नित नया इतिहास लिखते
बढ़ चले...
और शेष जो था
वो मेरे अंतस में
अंकित सत्व तेरा,
फूलता-फलता रहा...

Wednesday, May 7, 2014

मुझे ऐसी जगह ले चलो 
जहाँ उम्मीद खत्म हो जाये 
और नाउम्मीदी को 
बस बख़्श दिया  जाये

मुझे ऐसी जगह ले चलो
जहाँ टूटे सपनों की परतें 
थोड़ी-थोड़ी कर अपने जिस्म से उतार सकूँ 
और हिम्मत का मुखौटा भी न लगाना पड़े 

मुझे ऐसी जगह ले चलो 
जहाँ बस एक बार थक कर, टूट कर बैठ सकूँ 
और खुद को या किसी और को 
कोई जवाब न देना पड़े 

मुझे ऐसी जगह ले चलो 
जहाँ रोऊँ तो अन्दर सब खाली हो जाये 
किसी दर्द, किसी मुहब्बत का 
कोई नामोनिशान न रह जाये