मैं पूरे चाँद की दुहिता
बैठी बस दर्शक बन
देखूँ विद्रूप नया नित
द्वंद्व नया नित
भीषण कलरव जीवन का
हाँ दो ईश्वर तो निश्चित हैं
बसते हैं अंतस में
रचते हैं
रजनी की छलना
मैं पूरे चाँद की दुहिता
बैठी बस दर्शक बन
देखूँ विद्रूप नया नित
द्वंद्व नया नित
भीषण कलरव जीवन का
हाँ दो ईश्वर तो निश्चित हैं
बसते हैं अंतस में
रचते हैं
रजनी की छलना
मैं पूरे चाँद की दुहिता

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