मैं उम्म गादा से मिलना चाहती हूँ
पूछना चाहती हूँ
कि कैसे जुटाई उसने ताकत
अपने बच्चों के जले हुए टुकड़े बटोरने की
कैसे जुटाया इतना धीरज
कि बिना टूटे हर उस इंसान को दिखा सके
युद्ध का सच
जो गोलियाँ चलने की
बम गिरने की
इंसानों के टुकड़े-टुकड़े होने की
किसी भी वज़ह से वकालत करता है
सधे हुए शब्दों में
ज़िंदा क़ब्रगाहों की कहानी सुना सके
****
मैं उस बेनाम क़ैदी से मिलना चाहती हूँ
जिसे महीने के उन चार दिनों के लिए
बिना कपड़ों के
उल्टा लटका दिया जाता है
और उसके जिस्म के साथ-साथ
उसकी आत्मा भी
अपने ही खून में तर-बदर होती रहती है
मैं उससे कुछ पूछना नहीं चाहती
बस उसकी आँखों में
जीवन के कण ढूंढ़ना चाहती हूँ
ताकि फिर से मेरे कलम की बेचैनी
या उसका दर्द
थक न जाए
फिर से मैं ये ग़लतफ़हमी न पाल लूँ
कि ख़ुदा 'मेरी' नहीं सुनता
पूछना चाहती हूँ
कि कैसे जुटाई उसने ताकत
अपने बच्चों के जले हुए टुकड़े बटोरने की
कैसे जुटाया इतना धीरज
कि बिना टूटे हर उस इंसान को दिखा सके
युद्ध का सच
जो गोलियाँ चलने की
बम गिरने की
इंसानों के टुकड़े-टुकड़े होने की
किसी भी वज़ह से वकालत करता है
सधे हुए शब्दों में
ज़िंदा क़ब्रगाहों की कहानी सुना सके
****
मैं उस बेनाम क़ैदी से मिलना चाहती हूँ
जिसे महीने के उन चार दिनों के लिए
बिना कपड़ों के
उल्टा लटका दिया जाता है
और उसके जिस्म के साथ-साथ
उसकी आत्मा भी
अपने ही खून में तर-बदर होती रहती है
मैं उससे कुछ पूछना नहीं चाहती
बस उसकी आँखों में
जीवन के कण ढूंढ़ना चाहती हूँ
ताकि फिर से मेरे कलम की बेचैनी
या उसका दर्द
थक न जाए
फिर से मैं ये ग़लतफ़हमी न पाल लूँ
कि ख़ुदा 'मेरी' नहीं सुनता
