एक पराये देश में
एक पराया अजनबी
एक परायी जुबान बोलते बोलते
आपके कानो में
आपकी भाषा का एक शब्द कहता है
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जाने कितनी देर तक
दो सृष्टियों में
दो अस्तित्व लेकर
समय के दोनो पहियों को
काठ के एक तख्ते में
जोड़ती रही
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उस पराये देश का
वह पराया अजनबी
दूर, बहुत दूर
अपने पराये कदम
आपकी धरती पर रख रहा है
उसकी मिट्टी की खुशबु
साँसों में भर रहा है

khub....
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