Tuesday, December 20, 2011

तुम मुझसे घृणा नहीं कर सकते
तुम बस व्यथित हो
अपनी किसी अकथ्य पीड़ा में घुल रहे हो
या अनैतिक सभाओं में
मेरी लाज बचाते बचाते थक गए हो
मेरे निर्वीर्य पतियों के प्रति
मेरा समर्पण देख कर ऊब चुके हो
पर तुम मुझसे घृणा नहीं कर सकते
तुम्हें 'तुम' बोलने का अधिकार
आज भी सिर्फ मेरा है
तुम्हारी बांसुरी किसी के लिए भी हो
उसकी तान समझने का
सामर्थ्य मात्र मुझमें है
तुम मुझसे घृणा नहीं कर सकते
मेरा छोटा सा संसार तुम्हारा ही रचा है
और तुम्हारी विशाल सृष्टि
मुझसे ही सुरभित है
तुम्हारा युद्ध हो या मेरा अज्ञातवास
अक्षयपात्र तुम्हें ही भरना है
और लहू मुझे ही पीना है
तुम मुझसे घृणा नहीं कर सकते

तुम मुझसे घृणा नहीं कर सकते
क्योंकि तुम्हारी घृणा का भार
वहन करने की क्षमता नहीं है मुझमें
क्योंकि मेरे सखा तुमसे परे 
मेरा अस्तित्व असार है
तुम मुझसे घृणा नहीं कर सकते
क्योंकि तुमने मुझे प्रीत भी सिखाई है
और प्रतिशोध भी
मेरी जय भी तुम हो
और पराजय भी
मेरी गरिमा भी तुम हो
और कलंक भी
तुम मुझसे घृणा नहीं कर सकते 

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