Wednesday, July 16, 2008

वो सच तुम्हारा

आज भी ऊँगली उठाता है

किसी विश्वास पर...

विश्वास जो लंगड़ाता चल रहा है

तुम्हारे साथ

तुम्हारी परछाई बन...

ये किसी अनागत का दरस नहीं...

ये किसी भविष्य कि पीड़ा नहीं..

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