वो सच तुम्हारा
आज भी ऊँगली उठाता है
किसी विश्वास पर...
विश्वास जो लंगड़ाता चल रहा है
तुम्हारे साथ
तुम्हारी परछाई बन...
ये किसी अनागत का दरस नहीं...
ये किसी भविष्य कि पीड़ा नहीं..
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