Saturday, December 6, 2008

कोई अजनबी दुनिया है शायद जहाँ
वक़्त रुकता है और आपसे ढेर सारी बातें करता है...
एहसासों को पल पल जीता है

कोई अजनबी दुनिया है शायद जहां
ज़माने का शोर आपके कानों से महज़ टकरा कर लौट जाता है
आपकी आत्मा में उतर कर आपके रेशे रेशे को नहीं चबा जाता

Tuesday, October 14, 2008


मृत्यु सी जिह्वा निकाले आज
पूछे काल मुझसे-
"क्यों नहीं जलती
विकट संग्राम बन कर
एक वह्नि जो तुम्हारी हर शिरा में
रक्त बनकर बह रही है।
क्यों नहीं फिर से उठाता शीश
तेरी आत्मा में श्वास लेता
क्रान्ति का वह तूर्य
जिसने प्रण लिया था मुक्ति का।"

Thursday, July 17, 2008

हमने बेरुखी में आपकी
एक कश्मकश तो ज़रूर देखी है...

ये मुमकिन नहीं
कि वक़्त सिर्फ हमारी आँखों में रुका रहा


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कोई काफ़िरों में नाम लिख दो हमारा
अब ये बंदगी हमसे निभाई नहीं जाती...

ये तुरबत तुम्हारी नहीं होगी किसी भी दम
कि कटे हाथों से तस्वीर बनायीं नहीं जाती...

Wednesday, July 16, 2008

वो सच तुम्हारा

आज भी ऊँगली उठाता है

किसी विश्वास पर...

विश्वास जो लंगड़ाता चल रहा है

तुम्हारे साथ

तुम्हारी परछाई बन...

ये किसी अनागत का दरस नहीं...

ये किसी भविष्य कि पीड़ा नहीं..

Monday, July 14, 2008

किसे नहीं मालूम
कि कुछ घंटो का सफ़र बस बाकी है...

मेरे मोहसिन तुमसे कुछ कहने को जी करता है...
तुमसे कुछ सुनने को जी करता है...
उनकी आँखें जाने कितनी देर
एक शून्य को निहारती रहीं...

और हम इस उम्मीद में बैठे रहे
कि कोई सहर इस रास्ते भी गुज़रेगी...
एक खाली कैनवस सी ज़िन्दगी...
जिसमे झाँको तो
अपनी ही सूरत काली नज़र आती है...

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आज फिर एक अचीन्हे लोक के
अचीन्हे देवता की आवाज़ सुन
किसी ने अपनी मिट्टी बदल ली.. :)

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Saturday, June 21, 2008

शब्द मिलते जो
दिशा भी ढूँढ लाती मैं कहीं से...
यूँ विहग सी
भीत, व्याकुल चुप न रहती लेखनी भी...
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क्यूँ धरा की कुक्षि से
अब जन्म लेता तिमिर है
क्यूँ नहीं अब परशु ले कर
निकलता कोई सूर्य है....