कोई अजनबी दुनिया है शायद जहाँ
वक़्त रुकता है और आपसे ढेर सारी बातें करता है...
एहसासों को पल पल जीता है
कोई अजनबी दुनिया है शायद जहां
ज़माने का शोर आपके कानों से महज़ टकरा कर लौट जाता है
आपकी आत्मा में उतर कर आपके रेशे रेशे को नहीं चबा जाता
Saturday, December 6, 2008
Tuesday, October 14, 2008
Thursday, July 17, 2008
Wednesday, July 16, 2008
Monday, July 14, 2008
Subscribe to:
Comments (Atom)
