ये वक़्त भी रुका सा
और आँखों के आगे
दूर तक
क्षितिज के भी पार
सब कुछ ठहरा सा...
****
तुम्हारे स्वप्न ढूंढते हैं
मेरे प्रश्नों के उत्तर
और मेरे प्रश्न युगों युगों तक
नाचते हैं तुम्हारे
अंतस के वृत्त पर...
****
कोई इस ज़मीन पर
क्रांति की बात करता है
'कोशिशों' की,
बदलाव की.
कोई इन आँखों में
फिर नए स्वप्न देखना चाहता है...
और आँखों के आगे
दूर तक
क्षितिज के भी पार
सब कुछ ठहरा सा...
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तुम्हारे स्वप्न ढूंढते हैं
मेरे प्रश्नों के उत्तर
और मेरे प्रश्न युगों युगों तक
नाचते हैं तुम्हारे
अंतस के वृत्त पर...
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कोई इस ज़मीन पर
क्रांति की बात करता है
'कोशिशों' की,
बदलाव की.
कोई इन आँखों में
फिर नए स्वप्न देखना चाहता है...
