अंधे युग की आधी कविता में
सीमित युग का इतिहास हुआ
इस युग की छलना,
युग की रचना बन रचती है द्यूत नया
गढ़ती है एक अदृश्य व्यवस्था
सारे शब्दों और अर्थों को
और काट फेंकती है रचना से
मतभेदों के अंशों को
कुछ शब्द नए, सन्दर्भ नए
इन एकतरफ़ा संवादों में
मैं द्वंद्व ढूँढने निकली हूँ
शब्दों की छुपी दरारों में
सीमित युग का इतिहास हुआ
इस युग की छलना,
युग की रचना बन रचती है द्यूत नया
गढ़ती है एक अदृश्य व्यवस्था
सारे शब्दों और अर्थों को
और काट फेंकती है रचना से
मतभेदों के अंशों को
कुछ शब्द नए, सन्दर्भ नए
इन एकतरफ़ा संवादों में
मैं द्वंद्व ढूँढने निकली हूँ
शब्दों की छुपी दरारों में
