Wednesday, October 2, 2013

हर दिन जब सूरज सुबह सुबह
एक फूंक मार जगाता है
और तुम्हारे पहलू में
अलसायी आँखें खुलती हैं

हम देर तलक सांसें रोके
बस तुमको देखा करते हैं
और धीरे-धीरे हर पल को
मन की किताब में लिखते हैं
यादों की शक्लें देते हैं

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जब पास नहीं होते हो तुम
उन रंग उड़ी सी यादों को
एक सपनों की अलमारी में
तह कर कर के रखते हैं

और जब तब मन की कुण्डी खोल
घंटों उनको सीने से
चिपका कर सोया करते हैं
उन भूले बिसरे लम्हों की
कोई खुशबू ढूँढा करते हैं