मैंने अपना खिज़र बदल लिया है
थोड़ा कमज़ोर सा है
पर झूठे वादे नहीं करता
न परीकथाओं से स्वप्न दिखाता है
न किसी सच के चीथड़े ओढ़
क्रान्ति की दुहाई देता है
थोड़ा कमज़ोर सा है
पर जानता है कि कमज़ोर है
न खुद भ्रम में जीता है
न दूसरों को बाध्य करता है
लड़ता है, जीतता है, हारता है
*****
मैंने अपना खिज़र बदल लिया है
क्योंकि बरसों जिसकी दहलीज़ पर सजदे किये
वो मेरा नहीं है
शायद किसीका नहीं है
सिवाए अपनी ताकत के
जिसे वह हाथ से जाने नहीं देता
इस अंधी दुनिया की ख़िलाफ़त करता है
पर उसके आँखों की पट्टी उतरने नहीं देता
कितने आंसूं और कितनी मुहब्बत
उसकी बादशाहत बरकरार रखेंगी
यह तय करता है
*****
मैंने अपना खिज़र बदल लिया है
इस उम्मीद में नहीं कि
एक दिन वह मेरे पुराने पैग़म्बर को हरा देगा
बल्कि इसलिए क्योंकि अब
मेरे सजदे मुझे खुद लिखने हैं
मेरे आंसू मुझे खुद भरने हैं
क्योंकि मुझे उम्मीद के हथियार से
से कोई लड़ाई नहीं लड़नी
क्योंकि मुझे अब किसी पैग़म्बर से
उसके शर्तों पे
मुहब्बत या नफ़रत नहीं करनी
थोड़ा कमज़ोर सा है
पर झूठे वादे नहीं करता
न परीकथाओं से स्वप्न दिखाता है
न किसी सच के चीथड़े ओढ़
क्रान्ति की दुहाई देता है
थोड़ा कमज़ोर सा है
पर जानता है कि कमज़ोर है
न खुद भ्रम में जीता है
न दूसरों को बाध्य करता है
लड़ता है, जीतता है, हारता है
*****
मैंने अपना खिज़र बदल लिया है
क्योंकि बरसों जिसकी दहलीज़ पर सजदे किये
वो मेरा नहीं है
शायद किसीका नहीं है
सिवाए अपनी ताकत के
जिसे वह हाथ से जाने नहीं देता
इस अंधी दुनिया की ख़िलाफ़त करता है
पर उसके आँखों की पट्टी उतरने नहीं देता
कितने आंसूं और कितनी मुहब्बत
उसकी बादशाहत बरकरार रखेंगी
यह तय करता है
*****
मैंने अपना खिज़र बदल लिया है
इस उम्मीद में नहीं कि
एक दिन वह मेरे पुराने पैग़म्बर को हरा देगा
बल्कि इसलिए क्योंकि अब
मेरे सजदे मुझे खुद लिखने हैं
मेरे आंसू मुझे खुद भरने हैं
क्योंकि मुझे उम्मीद के हथियार से
से कोई लड़ाई नहीं लड़नी
क्योंकि मुझे अब किसी पैग़म्बर से
उसके शर्तों पे
मुहब्बत या नफ़रत नहीं करनी
