वक़्त-बेवक़्त तुम्हारी आत्मा में सर उठाता विद्रोह
सबसे ख़तरनाक नहीं होता
कानों के परदे फाड़ डालने वाला, अल्फाजों से उठता शोर
सबसे ख़तरनाक नहीं होता
दिल को हलक तक खींच लाती तुम्हारे उम्मीद की चीख
सबसे ख़तरनाक नहीं होती
सबसे ख़तरनाक होता है
सपनों के अस्थिपंजर को घूरना,
और पलकें झपकना भूल जाना
और पलकें झपकना भूल जाना
सबसे ख़तरनाक होता है
अपने और अपनों के लिए
redundant हो जाना
फिर एक दिशा-हीन आंधी में
खुद को बहने देना
और अवचेतना का भ्रम पाल लेना
फिर एक दिशा-हीन आंधी में
खुद को बहने देना
और अवचेतना का भ्रम पाल लेना
सबसे खतरनाक वह शाबाशी होती है
जो तुम्हारी हार के बाद भी
तुम्हारी पीठ पर पड़ती है
और घंटों तुम्हारे होठों पर
हंसी बनकर बिखरी रहती है
सबसे ख़तरनाक वह सन्नाटा होता है
जो सूइयों की तरह चुभता है
और मन के vacuum में
तुम्हारी सांसें टटोलता है
सबसे खतरनाक वह आइना होता है
जो हर सुबह तुमसे कहता है
कि तुम तैयार हो
जाओ एक मशीन के सामने बैठो
और किसी के दर्द की profiling करो
सबसे खतरनाक वह सुबह होती है
जो एक गहरी नींद लाती है
और तुम्हारे कानों में चुपके से गुनगुनाती है
'सो जा मुर्दे,
ये लड़ाई तो सपने में लड़ी जायेगी'
वक़्त-बेवक़्त तुम्हारी आत्मा में सर उठाता विद्रोह
सबसे खतरनाक वह आइना होता है
जो हर सुबह तुमसे कहता है
कि तुम तैयार हो
जाओ एक मशीन के सामने बैठो
और किसी के दर्द की profiling करो
सबसे खतरनाक वह सुबह होती है
जो एक गहरी नींद लाती है
और तुम्हारे कानों में चुपके से गुनगुनाती है
'सो जा मुर्दे,
ये लड़ाई तो सपने में लड़ी जायेगी'
वक़्त-बेवक़्त तुम्हारी आत्मा में सर उठाता विद्रोह
सबसे ख़तरनाक नहीं होता
कानों के परदे फाड़ डालने वाला, अल्फाजों से उठता शोर
सबसे ख़तरनाक नहीं होता
दिल को हलक तक खींच लाती तुम्हारे उम्मीद की चीख
सबसे ख़तरनाक नहीं होती
