कुछ यादों की मैंने मूर्ति बना कर
मन-मंदिर में प्रतिष्ठित कर दिया है
कि पूजा की धूप-बाती
अंतस को सुरभित करती रहे
कुछ यादों को मैंने शब्दों में सहेज कर रखा है
कि कहीं कल एक दूसरे को देख न पायें
तो उन शब्दों से गीत लिखेंगे
इस उम्मीद के साथ कि
हमारे गीत एक दूसरे के कानों तक पहुँच सकें
कुछ यादों के मैंने गोटे और सितारे बनाये हैं
अपने ब्याह की ओढ़नी में टाँकने के लिए
ताकि आपका आशीर्वाद उनसे छन कर
मेरी मांग पर बरसे
कुछ यादों की मैंने ऊँगली थाम कर रखी है
इस भीड़ के छँटने तक,
फिर बैठेंगे आराम से
और ढेर सारी बातें करेंगे
कुछ यादों को बस याद बना कर
अपनी आँखों में रोक लिया है
कि जब एक अच्छी नींद आये
तो एक बार फिर से आपसे
अपने सपनों में मिल लूँ...
मन-मंदिर में प्रतिष्ठित कर दिया है
कि पूजा की धूप-बाती
अंतस को सुरभित करती रहे
कुछ यादों को मैंने शब्दों में सहेज कर रखा है
कि कहीं कल एक दूसरे को देख न पायें
तो उन शब्दों से गीत लिखेंगे
इस उम्मीद के साथ कि
हमारे गीत एक दूसरे के कानों तक पहुँच सकें
कुछ यादों के मैंने गोटे और सितारे बनाये हैं
अपने ब्याह की ओढ़नी में टाँकने के लिए
ताकि आपका आशीर्वाद उनसे छन कर
मेरी मांग पर बरसे
कुछ यादों की मैंने ऊँगली थाम कर रखी है
इस भीड़ के छँटने तक,
फिर बैठेंगे आराम से
और ढेर सारी बातें करेंगे
कुछ यादों को बस याद बना कर
अपनी आँखों में रोक लिया है
कि जब एक अच्छी नींद आये
तो एक बार फिर से आपसे
अपने सपनों में मिल लूँ...
