Saturday, December 6, 2008

कोई अजनबी दुनिया है शायद जहाँ
वक़्त रुकता है और आपसे ढेर सारी बातें करता है...
एहसासों को पल पल जीता है

कोई अजनबी दुनिया है शायद जहां
ज़माने का शोर आपके कानों से महज़ टकरा कर लौट जाता है
आपकी आत्मा में उतर कर आपके रेशे रेशे को नहीं चबा जाता